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छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी का योगदान: 1920 की पहली यात्रा, कंडेल नहर सत्याग्रह

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छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी का योगदान, 1920 का पहला प्रवास, कंडेल नहर सत्याग्रह, पं. सुंदरलाल शर्मा, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव और 1933 की हरिजन सेवा यात्रा की पूरी जानकारी
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Written & Reviewed by Yuvraj Pratap Rajwade

Independent Web Developer and Publisher
• Last Updated: 25 August 2026

छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महात्मा गांधी का योगदान एक महत्वपूर्ण अध्याय है। गांधीजी के विचारों और उनके छत्तीसगढ़ प्रवास ने यहां के किसान आंदोलन, जनजागरण और राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा देने में भूमिका निभाई।

विशेष रूप से कंडेल नहर सत्याग्रह को छत्तीसगढ़ में गांधीवादी आंदोलन के महत्वपूर्ण शुरुआती आंदोलनों में गिना जाता है। यह आंदोलन धमतरी क्षेत्र के कंडेल गांव में किसानों द्वारा नहर संबंधी कर और ब्रिटिश प्रशासन की नीतियों के विरोध में चलाया गया था।

महात्मा गांधी पहली बार छत्तीसगढ़ कब आए?

महात्मा गांधी का पहला छत्तीसगढ़ प्रवास दिसंबर 1920 में हुआ। उनका यह दौरा कंडेल नहर सत्याग्रह की पृष्ठभूमि में हुआ था।

भारत सरकार के Azadi Ka Amrit Mahotsav के Digital District Repository के अनुसार, गांधीजी 21 दिसंबर 1920 को धमतरी पहुंचे और कंडेल नहर सत्याग्रह से जुड़े किसानों के आंदोलन के समर्थन में वहां आए।

कुछ स्थानीय ऐतिहासिक स्रोत गांधीजी के 20 दिसंबर 1920 को रायपुर पहुंचने और अगले दिन धमतरी-कंडेल जाने का उल्लेख करते हैं। इसलिए परीक्षा की तैयारी करते समय प्रश्न के संदर्भ को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

परीक्षा के लिए याद रखें

1920 → गांधीजी का प्रथम छत्तीसगढ़ प्रवास → कंडेल नहर सत्याग्रह

कंडेल नहर सत्याग्रह क्या था?

कंडेल नहर सत्याग्रह छत्तीसगढ़ के धमतरी क्षेत्र के कंडेल गांव में किसानों द्वारा चलाया गया आंदोलन था।

ब्रिटिश शासन के समय किसानों पर नहर के पानी से संबंधित कर लगाया गया था। भारत सरकार के Digital District Repository के अनुसार, किसानों पर नहर का पानी चोरी करने का आरोप लगाकर उनसे भारी कर वसूलने का प्रयास किया गया। इसके विरोध में किसानों ने आंदोलन शुरू किया, जिसे आगे चलकर कंडेल नहर सत्याग्रह के नाम से जाना गया।

यह आंदोलन केवल स्थानीय किसानों की समस्या तक सीमित नहीं रहा। धीरे-धीरे यह राष्ट्रीय आंदोलन की व्यापक धारा से जुड़ गया।

कंडेल नहर सत्याग्रह के प्रमुख नेता कौन थे?

कंडेल आंदोलन में कई स्थानीय नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इनमें प्रमुख नाम हैं:

  • पंडित सुंदरलाल शर्मा
  • बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव
  • पंडित नारायण राव मेघावाले

कंडेल नहर सत्याग्रह जुलाई 1920 में धमतरी तहसील के कंडेल गांव में पंडित सुंदरलाल शर्मा, नारायण मेघावाले और बाबू छोटेलाल के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ था।

भारत सरकार के स्रोत में भी बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव को कंडेल नहर सत्याग्रह के प्रमुख आयोजकों में बताया गया है।

गांधीजी का कंडेल नहर सत्याग्रह से क्या संबंध था?

कंडेल में आंदोलन तेज होने के बाद गांधीजी को इसकी जानकारी दी गई। उन्हें छत्तीसगढ़ आने के लिए आमंत्रित करने में पंडित सुंदरलाल शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है।

गांधीजी के धमतरी आगमन ने आंदोलन को व्यापक राष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद की। भारत सरकार के Digital District Repository के अनुसार, गांधीजी के कंडेल पहुंचने की खबर से ब्रिटिश प्रशासन ने किसानों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों और कार्रवाई को वापस लिया तथा किसानों को राहत मिली।

इसी कारण कंडेल नहर सत्याग्रह को छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष महत्व दिया जाता है।

कंडेल नहर सत्याग्रह क्यों महत्वपूर्ण था?

कंडेल आंदोलन की खासियत यह थी कि इसमें स्थानीय किसानों ने संगठित होकर ब्रिटिश प्रशासन की नीतियों का विरोध किया।

इस आंदोलन से कई महत्वपूर्ण बातें सामने आती हैं:

  1. किसानों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ी।
  2. स्थानीय समस्या राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ी।
  3. सत्याग्रह और अहिंसक विरोध की भावना को बल मिला।
  4. स्थानीय नेताओं की भूमिका मजबूत हुई।
  5. गांधीवादी विचारों का छत्तीसगढ़ में प्रभाव बढ़ा।

भारत सरकार के एक अन्य स्रोत में कंडेल नहर सत्याग्रह को ब्रिटिश शासन के खिलाफ शुरुआती महत्वपूर्ण सत्याग्रहों में बताया गया है और बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव की भूमिका का उल्लेख किया गया है।

पंडित सुंदरलाल शर्मा और महात्मा गांधी

छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन में पंडित सुंदरलाल शर्मा का नाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

उन्होंने किसान, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। कंडेल नहर सत्याग्रह के संदर्भ में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इसलिए CGPSC, CGSSB और अन्य छत्तीसगढ़ सामान्य ज्ञान परीक्षाओं के लिए यह संबंध याद रखना उपयोगी है:

पंडित सुंदरलाल शर्मा → कंडेल नहर सत्याग्रह → महात्मा गांधी का छत्तीसगढ़ आगमन

गांधीजी का छत्तीसगढ़ में जनजागरण

गांधीजी का छत्तीसगढ़ दौरा केवल एक आंदोलन तक सीमित नहीं था। उनके विचारों से यहां राष्ट्रीय आंदोलन के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी।

रायपुर और धमतरी जैसे क्षेत्रों में उनके कार्यक्रमों और सभाओं में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का उल्लेख मिलता है। ([Sahapedia][3])

उनका संदेश मुख्य रूप से:

  • स्वराज
  • सत्याग्रह
  • अहिंसा
  • स्वदेशी
  • राष्ट्रीय एकता
  • सामाजिक सुधार

जैसे विषयों से जुड़ा था।

गांधीजी और स्वराज्य फंड

1920 के दौर में राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत करने के लिए आर्थिक सहयोग जुटाना भी महत्वपूर्ण था। गांधीजी ने अपने दौरे के दौरान स्वराज्य फंड के लिए सहयोग जुटाने का कार्य भी किया।

इससे पता चलता है कि उनका दौरा केवल भाषणों तक सीमित नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन को संगठित और मजबूत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा था।

1933 में गांधीजी का छत्तीसगढ़ दौरा

गांधीजी का छत्तीसगढ़ से दूसरा महत्वपूर्ण संबंध 1933 के दौरे से जुड़ा है।

इस समय गांधीजी के राष्ट्रीय कार्यक्रम में हरिजन सेवा और अस्पृश्यता के खिलाफ सामाजिक सुधार प्रमुख विषय थे।

भारत सरकार के Digital District Repository के अनुसार, गांधीजी ने 24 नवंबर 1933 को कंडेल में बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के घर के सामने महिलाओं की सभा को संबोधित किया था। इस दौरान महिलाओं ने हरिजन समुदाय के कल्याण के लिए अपने सोने-चांदी के आभूषण स्वेच्छा से योगदान के रूप में दिए।

यह घटना छत्तीसगढ़ में गांधीजी के सामाजिक सुधार संबंधी कार्यों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

गांधीजी की छत्तीसगढ़ यात्रा क्यों याद रखनी चाहिए?

छत्तीसगढ़ के इतिहास को समझने के लिए गांधीजी के यहां आने को केवल एक यात्रा के रूप में नहीं देखना चाहिए।

उनके आगमन ने:

  • किसान आंदोलनों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने में मदद की।
  • सत्याग्रह की विचारधारा को मजबूत किया।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक जागरूकता बढ़ाई।
  • सामाजिक सुधार के मुद्दों को सामने लाया।
  • स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने में मदद की।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

प्रश्न उत्तर
गांधीजी का छत्तीसगढ़ से पहला महत्वपूर्ण प्रवास किस वर्ष हुआ? 1920
गांधीजी की पहली यात्रा किस आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुई? कंडेल नहर सत्याग्रह
कंडेल नहर सत्याग्रह कहां हुआ? कंडेल, धमतरी
कंडेल नहर सत्याग्रह किनसे जुड़ा था? नहर कर/नहर संबंधी ब्रिटिश प्रशासनिक नीति के विरोध से
कंडेल आंदोलन के प्रमुख नेताओं में कौन थे? पं. सुंदरलाल शर्मा, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव और नारायण राव मेघावाले
गांधीजी कंडेल कब पहुंचे? 21 दिसंबर 1920 — भारत सरकार के Digital District Repository के अनुसार
गांधीजी की 1933 की यात्रा किससे जुड़ी थी? हरिजन सेवा और सामाजिक सुधार

MCQs: महात्मा गांधी और छत्तीसगढ़

1. महात्मा गांधी का पहला छत्तीसगढ़ प्रवास किस वर्ष हुआ?

A. 1919
B. 1920
C. 1922
D. 1930

उत्तर: B — 1920

2. कंडेल नहर सत्याग्रह किस क्षेत्र से संबंधित था?

A. बिलासपुर
B. रायगढ़
C. धमतरी
D. सरगुजा

उत्तर: C — धमतरी

3. कंडेल नहर सत्याग्रह के प्रमुख नेताओं में कौन शामिल थे?

A. पं. सुंदरलाल शर्मा
B. बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव
C. नारायण राव मेघावाले
D. उपरोक्त सभी

उत्तर: D — उपरोक्त सभी

4. गांधीजी का कंडेल आगमन किस वर्ष हुआ?

A. 1918
B. 1919
C. 1920
D. 1921

उत्तर: C — 1920

5. गांधीजी की 1933 की छत्तीसगढ़ यात्रा का प्रमुख सामाजिक संदर्भ क्या था?

A. नमक सत्याग्रह
B. किसान आंदोलन
C. हरिजन सेवा
D. भारत छोड़ो आंदोलन

उत्तर: C — हरिजन सेवा

एक लाइन में याद करें

1920 → कंडेल नहर सत्याग्रह → धमतरी → पं. सुंदरलाल शर्मा, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव, नारायण राव मेघावाले → गांधीजी का आगमन

और 1933 के लिए:

1933 → गांधीजी → हरिजन सेवा → कंडेल

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी का प्रभाव समझने के लिए कंडेल नहर सत्याग्रह सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। 1920 में गांधीजी का छत्तीसगढ़ आगमन स्थानीय किसान आंदोलन और राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बना।

कंडेल के किसानों का आंदोलन, पंडित सुंदरलाल शर्मा और बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव जैसे स्थानीय नेताओं की भूमिका तथा गांधीजी के आगमन ने छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय आंदोलन को नई ऊर्जा दी। बाद के वर्षों में गांधीजी का सामाजिक सुधार से जुड़ा कार्य भी यहां देखने को मिला।

CGPSC, CGSSB और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए 1920, कंडेल नहर सत्याग्रह, धमतरी और प्रमुख नेताओं के नाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

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